रीवा

Rewa : 36 प्राइवेट स्कूलों को नोटिस जारी, क्या खत्म होगी मान्यता!

Rewa news : प्राइवेट स्कूल संचालकों की मनमानी पर लगाम लगाने हेतु प्रशासन हुआ सतर्क 

 

 

 

Rewa news : निजी विद्यालयों की मनमानी अक्सर देखने को मिलती है एक तरफ जहां अच्छी शिक्षा और व्यवस्था के नाम पर मोटी फीस वसूली जाती है तो वही स्कूल ड्रेस और किताब कॉपी में भी कमीशन खोरी चलती है और प्रतिवर्ष फीस भी मनमानी तरीके से बढ़ा दी जाती है निजी विद्यालयों की इस मनमानी पर अब सरकार लगाम लगाने जा रही है आज कलेक्टर रीवा श्रीमती प्रतिभा पाल द्वारा निजी विद्यालयों को आदेश जारी कर निर्देशित किया गया है कि विद्यालयों में फीस नहीं बढ़ाई जाएगी।

एक तरफ जाना कलेक्टर ने स्कूल संचालकों को आदेश जारी कर निर्देशित किया है, दूसरी तरफ शिक्षा विभाग में 36 स्कूलों को नोटिस जारी कर दिया है। अगर स्कूल संचालकों की तरफ से संतुष्ट जवाब नहीं आता है, और शासन के दिशा निर्देशों का उल्लंघन करते पाए जाते हैं तो स्कूलों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है. क्योंकि सरकार के निर्देशों का पालन न करने पर कई बार स्कूलों की मान्यता रद्द कर दी जाती है ।

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इन स्कूलों को जारी हुआ नोटिस 

 

 

 

जिन स्कूलों को नोटिस जारी हुआ है उनमें किड्स वर्ल्ड सीनियर सेकेण्डरी स्कूल रमकुई, ज्योति सीनियर सेकेण्डरी स्कूल बरा, फ्रोमेन्स मेमोरियल स्कूल गुढ़ चौराहा, सेक्रेड हार्ट कान्वेंट स्कूल पड़रा, दिल्ली पब्लिक स्कूल मैदानी, डीपॉल स्कूल मैदानी, वेदांता स्कूल अजगरहा सहित कई नामी स्कूल शामिल हैं।

 

 कमीशन खोरी की चर्चा 

 

आपको बता दें कि प्राइवेट स्कूलों पर अक्सर किताबों और स्कूल यूनिफॉर्म को एक निश्चित दुकान से अभिभावकों को खरीदने के लिए कहा जाता रहा है। और इस तरह की बातें भी सामने आती रही है . होता यह है कि निश्चित दुकान से यूनिफॉर्म और किताबें खरीदने पर स्कूल संचालक के पास अच्छी खासी कमीशन की रकम दुकानदार द्वारा पहुंचाई जाती है। इससे दोनों मालामाल रहते हैं पर बच्चों के अभिभावक इससे परेशान रहते है। स्कूल की किताबें और यूनिफॉर्म पर बिल्कुल भी छूट नहीं दी जाती है। कई बार देखा गया है कि डेढ़ सौ पन्ने की किताब 500 से ₹600 में मिलती है। जबकि उसकी वास्तविक कीमत ₹200 होती है. और महंगा बेचने पर परिजनों को छूट भी नहीं दी जाती है। इस तरह से बाजार में बच्चों के परिजन परेशान होते हैं। हर स्कूल संचालक अपनी अलग किताब चलाता है, और यही वजह है कि हर दुकान पर किताब उपलब्ध नहीं हो पाती। सरकार को करना चाहिए कि एक ही पैटर्न और बोर्ड से मान्यता प्राप्त विद्यालय एक ही तरह की शैक्षणिक सामग्री अपने स्कूलों में चलाएं . इस तरह से बच्चों को अपने बड़े भैया या मित्रों की किताब सेकंड हैंड लेकर पढ़ने में दिक्कत नहीं होंगी।

 

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